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चैनल: मेरा बुक शेल्फ


ब्लॉग्स (11)
जीवन के रंग, खुशियों के संगखुशी एक चिडि़या है, जो हमारे दिलों में चहकती है। खुशी एक तितली है, जो हमारी हथेलियों पर दमकती है। खुशी एक सहज अनुभूति है जो मन की क्यारी में महकती‍ है। इतनी ही खूबसूरत है खुशी तो फिर आखिर वह हमें मिलती क्यों नहीं? कहीं ऐसा तो ... आगे पढ़ें...

अश्कों में जो पाया है, वो गीतों में दिया है(स्मृति जोशी साहिर लुधियानवी : पुण्य स्मरण (25 अक्टूबर)साहिर अर्थात जादूगर। शब्दों के जादूगर ही थे साहिर। उनकी लेखनी से झरे गीतों का जादू आज भी सुधी श्रोताओं को मदहोश करने के लिए काफी है। सीधे-सादे बोलों में ... आगे पढ़ें...

रीडर्स डाइजेस्ट में पढ़ा यह किस्सा मैंने अपने सभी मित्रों को सुनाया है।अभिनेता और नाटककार पीटर उस्तीनोव किसी स्कूल के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि थे।जब स्कूल के प्रिंसिपल ने दो छात्रों के अनुत्तीर्ण होने की घोषणा की तो उस्तीनोव उन दोनों पिछड़े ... आगे पढ़ें...

* जानता हूँ कि तुझे ख़त न लिखूँगा लेकिन जाने क्यूँ तुझसे तेरे घर का पता चाहता हूँ।*मोहब्बत के दिनों की यही तो खराबी हैये रूठ जाए तो फिर लौट कर नहीं आते।* वो भी शायद रो पड़े वीरान क़ाग़ज़ देख केमैंने उनको आखिरी ख़त में लिखा कुछ भी नहीं।*ऐसा हुआ नहीं है, पर ... आगे पढ़ें...

एक ख़त मुझको मिला है आँसुओं के गाँव से दर्द अब चलने लगा है नन्हें नन्हें पाँव से । एक दिन डूब जाएगी काठ की ये कश्तियाँ कल समंदर कह रहा था छोटी छोटी नाव से । आगे पढ़ें...

सच्ची दोस्ती कभी व्यर्थ नहीं जाती यदि उसे प्रतिदान नहीं मिलता है तो वह लौट आती है और ह्रदय को मृदु और पावन बनाती है । आगे पढ़ें...

‍ ‍िज़न्दगी क्या है ?पीछे घना झंखाड़ , आगे गहरा जंगल ! अज्ञात के अँधेरे में तो वह और भी डरावनी लगती हैकभी भूला बिसरा किन्हीं झिलमिल सितारों का टिमटिमाता धूसर प्रकाश ,इस जंगल की पगडंडियों तक आ जाता है ।इन्हीं पगडंडियों से होने वाली यात्रा को हम लोग जीवन ... आगे पढ़ें...

जिसके साथ होकर भी तुम अकेले रह सकोवही साथ करने योग्य हैजिसके साथ होकर भी तुम्हारा अकेलापन दूषित ना होतुम्हारी तन्हाईतुम्हारा एकांत शुद्ध रहे जो अकारण तुम्हारी तन्हाई में प्रवेश ना करेंजो तुम्हारी सीमाओं का आदर करेंतुम्हारे एकांत पर आक्रामक ना होतुम बुलाओं ... आगे पढ़ें...

कभी नर्म नन्हीं हरी दूब का शीतल अभिस्पर्श है,कभी शुभ्र चँद्रमा की सौम्य ज्योत्सना प्रिय की एक झलक मात्र देखने की गुलाबी आकुलता है या उसकी अनुभूति को स्मृति में लाने की केसरिया ललक है प्यार उसकी आवाज सुनने को तरसते कानों की रक्तिम गुदगुदी है या उसके रूमाल ... आगे पढ़ें...

चाहो तो ले लो मेरे मन की तलाशी चाहो तो मिला लो मेरी आँखों में अपनी आँखों के दस्तखतनहीं मिटा सका उसे वक्त का प्रहार पूरी की पूरी अस्मिता में बचाकर रखी है मैंने तुम्हारी याद !(संकलित-नहीं जानती कब और कहाँ मिली यह कविता) आगे पढ़ें...

किताबें देखकर मैं खूशबु से भर उठती हूँ । मेरी नन्हीं सी लाइब्रेरी में वह सब है जो मुझे अच्छा लगता है। नरेश मेहता की प्रेम-कविताएँ पढ़कर गुलाब की पाँखुरियाँ मन में झरनें लगती है और महादेवी जी की लेखनी से दिल में मयूरपँख लहलहाने लगते हैं।काफ्का को पढ़कर ... आगे पढ़ें...